डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारतीय छात्रों के विदेश पलायन को रोकने की दिशा में कार्य करेगा। इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को देश में ही बेहतरीन शिक्षा और रोजगार के अवसर मुहैया कराना है। मंत्रालय अपनी इस योजना में देश के औद्योगिक संस्थानों की भी मदद लेगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, हम चाहते हैं कि भारतीय युवा विदेशी विश्वविद्यालयों में जाने की जगह भारत में रहकर ही अपनी शिक्षा ग्रहण करें। भारतीय उद्योगों एवं अन्य संस्थानों को नेतृत्व प्रदान कर उन्हें आगे बढ़ाएं।

उन्होंने कहा, हमारे शिक्षण संस्थान विश्वस्तरीय हैं। हमारे संस्थानों से निकले छात्र विश्व की शीर्ष कंपनियों को नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। इस वर्ष लगभग 50 हजार ऐसे छात्र जो विदेश जाकर पढ़ने के इच्छुक थे, उन्होंने स्वदेश में ही रहते हुए अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करने की इच्छा जताई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, हम इस प्रकार की योजना एवं वातावरण तैयार कर रहे हैं कि अगले वर्ष लगभग एक लाख ऐसे छात्रों को देश में ही शिक्षा मुहैया करा सकें, जो कि विदेश जाने के इच्छुक हैं।

खासतौर पर ऐसे भारतीय छात्रों के लिए जो विदेशों में जाकर पढ़ना चाहते थे, लेकिन अब कोरोना संकट के कारण ये छात्र अब वहां नहीं जा सकते। इनमें से कई छात्रों ने देश में ही रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करने के इच्छा जताई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने ऐसे छात्रों को जईई प्रवेश परीक्षा में शामिल होने का विशेष मौका प्रदान किया है।

विदेशी विश्वविद्यालयों में आवेदन कर चुके छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जेईई मेन की प्रवेश परीक्षा का फॉर्म भरने की अंतिम तारीख भी बढ़ाई गई। गौरतलब है कि जेईई (मेन) की परीक्षा 1-6 सितंबर के बीच होगी और नीट की परीक्षा 13 सितंबर को होगी। जेईई एडवांस की परीक्षा 27 सितंबर को होगी। पहले जेईई की परीक्षा 18 जुलाई से 23 जुलाई के बीच और नीट की परीक्षा 26 जुलाई को होनी थी।



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Students wishing to go abroad will now enroll in Indian institutions
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